भोपाल शहर की बढ़ती आबादी तथा नित्य नई बनती कॉलोनियों में सिंधी
समाज बसने लगा । त्यौहार के समय खासतौर पर चेट्रीचण्ड पर सभी को कुछ अधूरापन सा लगता था कि
क्या हम सभी एक शहर में रहने वाले एक साथ इकट्ठे होकर त्यौहार मना पायेंगे ? इस प्रश्न का
हल निकला वर्ष 1998 में जब पहली बार सुन्दरवन नर्सरी में चेट्रीचण्ड के पश्चात् एक दिवसीय
सिंधी मेला का आयोजन हुआ, जिसे भोपाल के सिंधी समाज ने अत्यंत सराहा । इसके पश्चात् युवाओं
तथा महिलाओं की भावना के अनुरूप वर्ष 2007 में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गरबा महोत्सव का
आयोजन भी सुंदर वन नर्सरी में किया गया (हम जानते ही है कि गरबा और सिंधी लोकनृत्य छेज में
काफी समानता है) इस कार्यक्रम को भी भारी सफलता मिली । इसके पश्चात् शिक्षा, खेल, साहित्य
इत्यादि क्षेत्रों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से वर्ष 2009 में प्रतिभा
सम्मान तथा महिलाओं की रुचि को ध्यान में रखकर कुकिंग कॉम्पीटिशन का आयोजन किया गया। इससे
अनेक लुप्त हो रहे सिंधी व्यंजनों का स्वाद हम सभी ले सके। इन कार्यक्रमों ने प्रतिभाओं का
आत्मबल बढ़ाया साथ ही कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ा ।
वर्ष 2012 में मेले के 15 वें वर्ष में सिन्धु प्रवाह स्मारिका का प्रकाशन किया गया जिसे
सम्पूर्ण भारत वर्ष में सिंधी समाज के विशिष्ट केन्द्रों, पंचायतों तथा हस्तियों ने पढ़ा,
पसंद किया व समिति को अपनी शुभकामनाऐं प्रेषित की हैं।
16 वें वर्ष में सिंधी मेला समिति द्वारा टेलीफोन डायरेक्टरी का प्रकाशन किया गया जिसमें
880 सदस्यों के नाम, उनके सम्पर्क नम्बर एवं ब्लड ग्रुप अंकित है। इस डायरेक्टरी के माध्यम
से अनेक जरुरतमंद लोगों को रक्त उपलब्ध कराया गया है, जिससे कई रोगियों की प्राणरक्षा संभव
हुई है । थैलीसेमियाँ जैसी गंभीर बीमारी के पीड़ितों की भी निरंतर सेवा जारी है, इस कार्य
से समाज व शहरवासियों के मन में मेला समिति की पहचान सेवा प्रकल्प के रूप में हुई है ।
मेला समिति के निरंतर होते कार्य विस्तार की कड़ी के रूप में महिलाओं का भी एक समूह तैयार
हो गया है, जो बालिकाओं एवं महिलाओं की समस्याओं पर गंभीरता से चिंतन कर उनका हल करने का
प्रयास करता है ।
इसी शैक्षणिक वर्ष 2014-15 में मेला समिति ने शिक्षा विंग का गठन कर ऐसे छात्र/छात्राओं को
जिन्हें स्कूल की फीस भरने, किताब/कापियाँ खरीदने में कठिनाई होती है, उनके आवेदन का
परीक्षण कर उन्हें यथासंभव मदद की जा रही है। साथ ही सिन्ध वेलफेयर सोसायटी, दिल्ली से
जुड़कर ऐसे होनहार विद्यार्थी जो अपनी आरंभिक शिक्षा के पश्चात् सिविल सर्विसेस की परीक्षा
में भाग लेना चाहते हैं, उन्हें उचित सलाह, मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान कर उनकी हर संभव
मदद की जा रही है। एक वृहद् लक्ष्य लेकर मेला समिति कार्य कर रही है, जिसे सम्पूर्ण समाज का
आर्शीवाद एवं सहयोग प्राप्त है ।
समिति के हम सभी साथी समाज को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि सिन्धी मेला समिति (SMS) केवल
कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी वरन् कमजोर वर्ग के छात्र / छात्राओं के उत्थान व आवश्यकता
पड़ने पर किसी भी क्षेत्र में समाज की हर संभव मदद के लिए एक सशक्त सेना के रूप में मौजूद
रहेगी।
संस्कृति सिंधी गरबा की 25 दिवसीय वर्कशॉप 22 सितंबर से प्रारंभ
18 से 21 अक्टूबर तक सुंदरवन में होगा मुख्य आयोजन



